अमावस्या को माना जाता है पूर्वजों का दिन, व्रत रखने से प्राप्त होता है आशीर्वाद

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अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। अमावस्या को पूर्वजों का दिन भी कहा जाता है। इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि अमावस्या के दिन पितरों की पूजा करने से पितर प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं। इस दिन की जाने वाली पूजा और व्रत का कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।

अमावस्या तिथि का नाम अमावसु नामक पितर पर रखा गया है और इसके स्वामी भी पितर ही हैं। अमावस्या के दिन पूजा-पाठ, उपाय और दान का अत्यधिक महत्व है। अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर भगवान का ध्यान करें। पितरों का स्मरण कर व्रत रखें। अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद या बुजुर्ग व्यक्ति को भोजन करने वाले और दान दें। ऐसा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन तामसिक पदार्थों के सेवन से दूर रहें। जिन लोगों की जन्म कुंडली में पितृ दोष है, वे इस दिन पितरों की पूजा अवश्य करें। ऐसी करने वाली जिंदगी में आने वाली हर बाधा दूर होती है। विशेष प्रकार की पूजा, उपासना के लिए भी अमावस्या तिथि को सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन किए जाने वाले तमाम उपाय शीघ्र ही शुभ फल प्रदान करते हैं। अमावस्या के दिन स्नान-दान का अत्यधिक महत्व है। इस दिन अन्न, वस्त्र, गो और स्वर्ण दान का शुभ फल प्राप्त होता है। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। अमावस्या की रात किसी काले कुत्ते को रोटी में तेल लगाकर खिलाएं। अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते और बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। पवित्र भावना से हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से अनहोनी से बचाव होता है।

इस ग्राफ़ में दी गई बदलाव धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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