कालाष्टमी व्रत – मान सम्मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि संबंधीता यह व्रत है

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हर महीने कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत किया जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव इसी दिन भैरव के रूप में प्रकट हुए। इसी दिन अहोई अष्टमी का पावन व्रत भी है। इस दिन रवि पुष्य-योग भी उपस्थित रहेंगे, जिससे इस बार व्रत का महत्त्व बढ़ेगा। अहोई अष्टमी का व्रत विशेष रूप से अपनी संतान की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य, जीवन में सफलता और समृद्धि के लिए किया है। इस व्रत में माता पार्वती को ही अहोई माता के रूप में पूजा जाती है। संतान प्राप्ति की इच्छुक स्त्रियाँ भी इस व्रत को करती हैं। इस दिन विशेष उपाय करने से धन लाभ और मान सम्मान के साथ प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

कालाष्टमी व्रत में कालभैरव और माता दुर्गा की उपासना करें। माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर रात्रि जागरण करें। कालाष्टमी व्रत करने वाला व्यक्ति रोगों से दूर रहता है और उसे हर कार्य में उसे सफलता प्राप्त होती है। कालाष्टमी व्रत रखने वाले व्यक्ति के जीवन से परेशानियां दूर हो जाती हैं। कालाष्टमी व्रत में नमक न खाएँ। किसी से झूठ न बोलें। माता-पिता और गुरु का अपमान न करें। कालाष्टमी के दिन घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। इस व्रत के प्रभाव से दुर्भाग्य दूर हो जाता है और सौभाग्य जागृत होता है। भगवान भैरव की उपासना करने वालों से काल भी दूर हो जाता है। इस व्रत में श्वान को भोजन करना शुभ माना जाता है। कालाष्टमी के दिन किसी मंदिर में काजल और कपूर का दान करें। इस व्रत के प्रभाव से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

इस ग्राफ़ में दी गई धार्मिक धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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