चम्पा षष्ठी – हर बाधा से संतान की रक्षा करता है यह पावन व्रत है

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मार्गशीर्ष मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को चंपाष्ठी का त्योहार मनाया जाता है। भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित इस त्योहार को लेकर मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय ने इसी तिथि पर तारकसुर का वध किया था। भगवान कार्तिकेय को चंपा के फूल पसंद हैं। इस कारण इस दिन को चंपा षष्ठी कहा जाता है।

चंपाष्ठी का व्रत संतान के अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। इस व्रत से संतान को बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान श्रीगणेश, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय और नंदी जी की पूजा करें। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ का ध्यान कर पूजा करने से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। चंपा षष्ठी व्रत करने से जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। इस दिन शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें। जरूरतमंदों को दान करें। भगवान कार्तिकेय को नीले वस्त्र अर्पित करें। इस व्रत में रात्रि में भूमि पर शयन करना चाहिए। इस दिन तेल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से सारी परेशानियों पर विराम लग जाता है। इस त्योहार को मनाने से सभी तरह के भय से रक्षा होती है। इस दिन शिव मंदिर में तिल के तेल के दीप जलाए जाते हैं। संतान प्राप्ति के लिए भगवान कार्तिकेय को खीर का भोग लगाकर बच्चों को बांधे।

इस ग्राफ़ में दी गई बदलाव धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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