दीपावली: खुशियों के इस त्योहार से जुड़ी कई मान्यताएं हैं

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सुख-समृद्धि और खुशियों के त्योहार दीपावली से कई धार्मिक और आकर्षक मान्यताएँ जुड़ी हुईं हैं। मां लक्ष्मी के सम्मान में मनाए जाने वाले इस त्योहार को अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। कुछ स्थानों पर दिवाली को नए साल की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है।

यह त्योहार भगवान श्रीराम और माता सीता के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या आगमन की खुशी में मनाया जाता है तो यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। यह भी माना जाता है कि दीपावली के दिन ही भगवान श्री हरि विष्णु ने नरसिंह रूप धारण किया था। जैन धर्म के अनुसार महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस दीपावली है। राजा बलि की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी याद में भूलोकवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली का त्योहार जयेंगे। स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के ही दिन शुरू हुआ था। भगवान गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने उनके स्वागत में लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर ने दीपावली के दिन ही शरीर का त्याग किया था। सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक भी दीपावली के दिन हुआ था। यह भी मान्यता है कि पांडव इसी दिन अज्ञातवास समाप्त कर हस्तिनापुर लौटे थे। कार्तिक अमावस्या के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण पहली बार गाय चराने गए थे। उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में इस दिन मां काली की पूजा की जाती है और इस त्योहार को काली पूजा कहा जाता है।

इस ग्राफ़ में दी गई धार्मिक धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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