पुरुषोत्तम माह – भगवान विष्णु इस महीने के अधिपति, धार्मिक पुस्तकों का करें दान

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हिंदू पंचांग में हर तीन साल में एक बार अतिरिक्त महीने का प्राकट्य होता है, इसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित हुआ। अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता न हो गए। ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से अनुरोध किया तो भगवान विष्णु ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। अधिकमास के अधिपति श्रीहरि भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास नाम से पुकारा जाता है।

मान्यता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का 10 गुना अधिक फल मिलता है। इस महीने यज्ञ-हवन का विशेष महत्व है। श्रीमद् देवीभागवत, श्री भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्यफल पुराण आदि का श्रवण, पठन इस महीने विशेष रूप से फलदायी है। अधिक मास में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इस महीने दान का विशेष महत्व है। अधिक मास में दीपदान करना और धार्मिक पुस्तकों का दान करना शुभ माना जाता है। अधिकमास में भूमि पर शयन करना चाहिए। एक समय सात्विक भोजन करना चाहिए। इस मास में व्रत रखते हुए भगवान विष्णु का श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए। श्री रामायण का पाठ या रुद्राभिषेक का पाठ करना चाहिए। श्रीविष्णु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। अधिकमास की शुक्ल एकादशी पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष की एकादशी परमा एकादशी कहती हैं। ये एकादशियों के व्रत पालन से प्रसिद्धि प्राप्त होती है। पुरुषोत्तम माह में किसी भी प्रकार का व्यसन न करें।

इस ग्राफ़ में दी गई बदलाव धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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