पौष माह – सूर्यदेव की उपासना का महीना पौष है

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पौष माह हिंदू पंचांग के अनुसार दसवां महीना है। पौष मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है, इस कारण इस महीने को पौष कहा जाता है। पौष माह कई उपसनाओं को अपने में लिए है। इस सबके केंद्र में भगवान सूर्य और भगवान लक्ष्मी नारायण हैं। पौष माह में भगवान सूर्य की उपासना से आयु में वृद्धि होती है और अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है। पौष माह में सूर्य उपासना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

पौष माह में गर्म वस्त्रों का दान उत्तम होता है। माना जाता है कि इस महीने लाल और पीले रंग के वस्त्र भाग्य में वृद्धि करते हैं। इस महीने घर में कर्पूर की सुगंध का प्रयोग करने से स्वास्थ्य बेहतर होता है। इस महीने हल्के लाल रंग के कपड़े पहनने चाहिए। इस महीने रविवार के दिन सुबह तांबे के बर्तन, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करना चाहिए। इस महीने प्रतिदिन माता-पिता के चरण स्पर्श करें। भगवान सूर्य की उपासना के लिए पौष का महीना सबसे महत्वपूर्ण बताया गया है। पौष मास आध्यात्मिक ऊर्जा संरक्षण का अवसर प्रदान करता है। इस महीने नमक का सेवन कम करना चाहिए। चीनी की जगह गुड़ का सेवन करें। इस महीने ठंडे पानी का प्रयोग न करें। इस महीने में शुक्ल पक्ष में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। पौष कृष्ण पक्ष एकादशी को पद्म पुराण में सफला एकादशी कहा गया है। इस व्रत से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। पौष शुक्ल एकादशी पुत्रदा एकादशी कहलाती है। पौष शुक्ल पक्ष की सप्तमी मार्तण्ड सप्तमी कहलाती है। मारतण्ड सूर्य का ही एक नाम है। इस महीने लोहड़ी का पर्व उत्साह से मनाया जाता है। इस महीने पोंगल का त्योहार भी मनाया जाता है। पौष पूर्णिमा को धार्मिक कार्यों, दान के लिए शुभ माना जाता है। पौष अमावस्या का भी बहुत महत्व माना जाता है।

इस ग्राफ़ में दी गई बदलाव धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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