भौम प्रदोष व्रत – हरिस दूर करता है यह व्रत, अयोग्य का मिलता है आशीर्वाद

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भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत यदि मंगलवार के दिन आया तो इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस पावन व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना की जाती है। इस व्रत के प्रभाव से सभी संकट दूर होते हैं और घर-परिवार में सुख समृद्धि आती है। प्रदोष व्रत में सुबह-शाम दोनों समय पूजा का विधान है। इस व्रत में सच्चे मन से भगवान शिव का अभिषेक करने से आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं और हर प्रकार के ऋण से मुक्ति मिलती हैं।]

प्रदोष व्रत के लिए त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्य उदय से पूर्व उठना चाहिए। इस व्रत में ओम नम: शिवाय का जाप करते रहो। दिनभर निराहार रहकर संध्या काल में स्नान के बाद संध्या वंदना करें। पूजा में भगवान शिव को लाल रंग का फूल नहीं अर्पित करना चाहिए। मंगलवार को प्रदोष तिथि आने के कारण इस दिन शाम को हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभदायी होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मंगल ग्रह की शांति भी हो जाती है। भौम प्रदोष व्रत में हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ करें। बजरंग बली को बूंदी के लड्डू अर्पित करें। हनुमान जी के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाते हैं। हलवा पूरी का भोग पाते हैं। सुंदरकांड का पाठ करें। हलवा पूरी का प्रसाद लोगों में बांट दो। इस व्रत के प्रभाव से रोगों से मुक्ति मिलती है और आयु में वृद्धि होती है। दांपत्य सुख बढ़ता है। इस व्रत को करने से परिवार हमेशा स्वस्थ रहता है।

इस ग्राफ़ में दी गई धार्मिक धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिन्हें केवल सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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