Serial Story- एक तवायफ मां नहीं हो सकती: भाग 4

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पर्चा पढ़ कर मैं ने शादो से पूछा कि क्या सरदारी बेगम की कोई लिखावट मिल सकती है? उस ने बताया कि वह बच्चों को पढ़ाती थी, घर में जरूर उन का लिखा हुआ कुछ न कुछ मिल जाएगा. मैं ने एक कांस्टेबल को शादो के साथ भेज दिया. उस ने घर जा कर सरदारी बेगम की लिखावट ढूंढ कर दे दी.

उन दोनों के जाते ही एएसआई शरीफ को ले कर आ गया. उसे देख कर मुझे गुस्सा आ गया. मैं ने एएसआई को जाने के लिए कहा. उस के जाते ही शरीफ कुरसी पर बैठ गया.

‘‘खड़े हो जाओ,’’ मैं ने छड़ी को जोर से मेज पर मार कर कहा, ‘‘सामने दीवार की ओर मुंह कर के खड़े हो जाओ.’’

उस ने कहा, ‘‘क्या हुआ आगा साहब, मैं ने क्या गलती कर दी?’’

वह मेरे सामने नाटक कर रहा था. उस ने अपनी मां की हत्या की और नाम शादो का लगा दिया. उसे हत्यारिन साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और मुझे भी झूठ बोल कर गलत रास्ते पर जांच करने पर लगा दिया.

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वह कुरसी पर बैठ चुका था और मेज पर हाथ रख लिए. मैं ने जोर से उस के हाथों पर छड़ी मारी, वह अपने हाथों को बगल में दबा कर सी…सी… करने लगा. उस की आंखों में आंसू आ गए.

‘‘अपना इकबाली बयान दो, नहीं तो तुम्हारी चमड़ी उधेड़ कर रख दूंगा.’’ मैं ने गुस्से में कहा.

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‘‘कैसा इकबाली बयान आगा साहब?’’ वह ढिठाई से बोला.

मैं उस के पास गया और छड़ी से उस का गला दबा कर कहा, ‘‘बको, जल्दी बको. तुम ने अपनी मां की हत्या की है या नहीं?’’

‘‘आप कैसी बातें कर रहे हैं आगा साहब, मैं अपनी मां की हत्या कैसे कर सकता हूं?’’

मैं ने उस की मां के हाथ का लिखा हुआ पर्चा दिखाते हुए कहा, ‘‘पढ़ो.’’

वह पर्चा लेना चाह रहा था. मैं ने उस का हाथ झटक दिया और कहा, ‘‘दूर से पढ़ो.’’

वह जैसेजैसे पर्चा पढ़ता जा रहा था, वैसेवैसे उस का शरीर ढीला पड़ता जा रहा था. फिर उस ने सिर झुका लिया. मैं ने उसे बताया कि यह पर्चा उस की मां के संदूक से मिला है. वह मेरी ओर आंखें फाड़ कर देखता रहा, बोला कुछ नहीं. मैं ने उसे बयान देने के लिए तैयार कर लिया. उस ने अपने बयान में बताया कि उसे मां के साथ शादो का रहना बिलकुल पसंद नहीं था. उस ने कई बार मां को शादो से अलग रहने के लिए कहा भी था, लेकिन वह तैयार नहीं हुई. उसे उस वक्त जबरदस्त झटका लगा, जब उस के पिता मसूद अहमद के एक मित्र ने उसे बताया कि शादो एक वेश्या है और उस का पिता शादो को लाहौर की हीरामंडी से ले कर आया था. ऐसी बातें सुनसुन कर वह कुढ़ता रहता था. उसे अपनी मां का एक बाजारू औरत के साथ रहना बिलकुल पसंद नहीं था, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह अपनी मां और शादो दोनों को जहर दे कर मार देगा.

उस ने हकीम जुम्मा खां से संखिया लिया और हलवा बना कर उस में मिला दिया और अपनी मां के घर ले गया. लेकिन उस दिन शादो घर में नहीं थी. उस ने मां को जोर दे कर हलवा खिलाया और उस से कहा कि यह हलवा शादो को भी खिलाना.

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कुछ ही देर में उस ने देखा, मां की हालत खराब हो रही है, वह सांस खींचखींच कर ले रही थी. वह वहां से भाग आया. बाद में उसे पता चला कि उस की मां मर गई. उस ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसे क्या पता था कि उस की मां मरतेमरते उसे फंसा जाएगी. उस ने वहां से भागने में जल्दी की, मरने के बाद आता तो मां को लिखने का मौका ही नहीं मिलता.

बयान लिख कर मैं ने शरीफ के हस्ताक्षर करा लिए और एक कांस्टेबल को हकीम जुम्मा खां को गिरफ्तार करने के लिए भेज दिया. वह भी गिरफ्तार हो कर थाने आ गया. मैं ने उसे अवैध रूप से जहर रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. मैं ने पूरे केस को मेहनत से तैयार किया और अदालत में पेश कर दिया. शरीफ को आजीवन कारावास की सजा मिली और हकीम को 2 साल की. इस तरह एक निकृष्ट बेटा अपने अंत को पहुंचा.

प्रस्तुति : एस. एम. खा

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